Category Archives: Works

देश प्रेम

तिरंगा झंडा देख कर ये ख्याल आता है के ये ख्याल कभी कभी ही क्यों आता है साल भर ये देश प्रेम कहाँ चला जाता है और एक छोटे से बदल की तरह दो-चार दिन की बारिश कर गायब हो जाता है देश प्रेम है, दवाई नहीं, जो दिन में दो बार ली जाये देश प्रेम [...]

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बारिश

आज बारिश ने आने की कोशिश तो की थी शाम में मौसम ने रिम्झिमाने की कोशिश तो की थी   दो चार बूदें और बस फिर कुछ नहीं  थोडा और रुक जाओ, हमने समझाने की कोशिश तो की थी 

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काला

तन काला है, मन काला है बुढ़ापा जवानी बचपन काला है दिन के बाद आती रात काली है कभी कभी तो रात के बाद का दिन काला है सुन्दरता का प्रतिरूप दिखाता, ये निर्मल योवन काला है भय काला है, हँसी काली है, काली अँधेरी रात में आने वाला स्वप्न काला है ये आम आदमी [...]

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Just saying….

Easier said than done!   Better done than said!!!!

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ज्ञानचंद दोहेवाले

मन में बात न छुपाइये, मन हो जाता भारी | दोस्तों से मिलिए, दिल से बोलिए, छोड़िये चिंता सारी ||

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सिस्टम की कहानी (System ki Kahani)

मेरा होश सँभालते ही, मासूमियत के समझदारी में बदलते ही एक दुश्मन से मुलाकात हुई क्या नाम दूं उसे ये समझ पाने की मुशक्कत में रात से दिन और दिन से रात हुई फिर एक दिन शाम को आवारागर्दी करते हुए एक दोस्त से एक शिकायत सुनी भाई बोला – यार गलती मेरी नहीं है| [...]

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ज्ञानचंद दोहेवाले

साधू संत सब कह गए, दिल को रखिये साफ़ | जो करेगा सो भरेगा, आप कीजिये सबको माफ़ || Prashant Bhardwaj, Feb’2011

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ज्ञानचंद दोहेवाले

छुट्टी ऐसे काटिए, के अपने खुश हो जाएँ| ना कोई अनजाना घर आये, और घर के न बहार जायें|| ना रोटी की चिंता, न नाश्ते की फिकर | साथ हो बातें हो, बातों से पेट भर जाये || Prashant Bhardwaj, Jan-2011

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ज्ञानचंद दोहेवाले

जब भी दिल करे बोलने का, करो अपनों से बात | अपने अपने ही रहे, न दिन देखें न रात || दिन देखें न रात, सदा ही सुन-ने को तैयार| बात तुम्हारी एक हो, चाहे बात तुम्हारी चार|| Prashant Bhardwaj, Jan’11

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ज्ञानचंद दोहेवाले

कॉरपोरेट जगत मूया, लगा राजनीती खेल | पीठ के पीछे गाली देवत, सामने पड़े तो मेल || Prashant Bhardwaj, Jan’11

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  • Chai Khata