Category Archives: हिंदी

खाली

  जो मैं इस के झूठों से खाली हुआ हूँ उसी पल से इतना मामूली हुआ हूँ इसे टुकड़ा टुकड़ा हज़म कर रहा हूँ जादू जो समझा…. ख़तम कर रहा हूँ नहीं जानता मैं भी क्या कर रहा हूँ ख्याल आ रहा है ये जाने कहाँ से मिट्टी है मिट्टी में ही दफन होगी ये [...]

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कमाई

तुम से प्रेम कमा लेता हूँ थोड़ी सी मेहनत लगती है पर पूरा सुख पा लेता हूँ क्या क्या जतन हुआ करते है आओ तुम्हे बता देता हूँ या रहने दो बोल के अक्सर चीज़ें बहुत गवा देता हूँ यूँ भी होता रहे तो काफी है मुझ को दिन ढल जाने तक ओस चाट के [...]

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ज़िक्र

खुद से भी अब यार करते नहीं की हम ने कितनो से बातें तेरी किसी खाली कोने में जब मुस्कुराये उजला हुआ चाँद तो गीत गाए FB का status बस इक smiley था हर बात मेरी तेरा ज़िक्र ही था कभी खत्म तुझ से सरोकार होगा हमें न पता था की ये दौर होगा- धुर्जटा

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धुआ

आसमान में तैरता है भ्रम हुआ मुहजोर मौसम टपकती है ओस संशय की सतह से सोखता है मन बनाया था जो पुतला समझा जिसे स्वरुप बिगड़ जाता है मैं खुद को समझने की चाह में रोज़ लिखता हूँ ढालता हूँ खुद को किसी विचार में विचार जो लिए होते है उधार में उधार चुका दिए [...]

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सोचता हूँ मैं मगर

जोर से सोचूं अगर तो ढूँढ लूँगा हल कई जोर देने का मगज पर मूड ही बनता नहीं सोचता हूँ की ठहर जाऊं किसी इक बात पर रिस्क भी तो ले के देखूं जान रख कर ताक पर इक अदद ये ज़िन्दगी है कुछ तो इस के साथ हो इतनी बातें सोच ली है सच [...]

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शादी

तुझ को दिल में रख कर सूरज के काटे चक्कर फेरे पड़ चुके है शादी हो गयी है अर्धांगिनी कहने में तुझ को कोई हर्ज़ नहीं है तेरी वजह से जान मेरी आधी हो गयी है – धुर्जटा

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राह

नशे में किया हुआ इक वादा होश के काँधे पर बैठा है बचपन में देखे थे सपने वो सब कितने बचकाने है हर दिन एक लकीर को काट मैं थोडा आगे बढ़ जाता हूँ नज़र जहाँ तक जाती है बस खड़ी लकीरें ही पता हूँ आते जाते तुम ने मुझ को यहाँ से अकसर देखा [...]

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समझ

बोली तो समझ में आती है कुछ बातें समझ में आती नहीं मैं एक पतंग को जानता हूँ जिस का रिश्ता आकाश से है जो उड़ जाये तो उड़ जाये पर बंधी हुई किसी पाश से है बिजली के तारों में उलझी वो रह रह कर सर को उठाती है खींच के लम्बी सांस कभी [...]

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निद्रा

अज्ञात की इक डोर मुझको कल्पना पकड़ा गयी थी उधेड़ता है और बुनता हूँ, बड़ा ही व्यस्त हूँ माजरा सारा समझ में आने ही वाला मुझे है नींद में ही चल रहा हूँ और सपने देखता हूँ – धुर्जटा

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दीवार

दुनिया से खुद को बांटने के लिए मैंने एक दीवार बनाई ईंटे कम थी इस लिए चार दीवारी बन नहीं पाई दीवार के इस तरफ खड़े है तीन वकील घड़ी, कैलंडर और आईना मैं जब कहता हूँ की वक्त रुक गया है तो तीनो बहस करने लगते है दीवार के उस तरफ दुनियावाले है जो [...]

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  • Chai Khata