Daily Archives: October 6, 2012

निद्रा

अज्ञात की इक डोर मुझको कल्पना पकड़ा गयी थी उधेड़ता है और बुनता हूँ, बड़ा ही व्यस्त हूँ माजरा सारा समझ में आने ही वाला मुझे है नींद में ही चल रहा हूँ और सपने देखता हूँ – धुर्जटा

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  • Chai Khata