ज्ञान वहां पर बांटिये, जहाँ मुनासिब होए |
ऐसन को ज्ञान न बांटिये, जो अब पाए तब खोये||
Prashant Bhardwaj, Jan’11
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ज्ञान वहां पर बांटिये, जहाँ मुनासिब होए |
ऐसन को ज्ञान न बांटिये, जो अब पाए तब खोये||
Prashant Bhardwaj, Jan’11
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धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय । माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय ॥
मेरा गाँव मेरा देस
आई एम् फिरोम पश्चिमी उत्तर प्रदेश
नदी किनारे साँप है; अकेले अकेले चाय पीना पाप है
काली माता आएगी, उठा के ले जायेगी !!!
दूध चीनी रोक के ! चाय पत्ती ठोक के !
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