छुट्टी ऐसे काटिए, के अपने खुश हो जाएँ|
ना कोई अनजाना घर आये, और घर के न बहार जायें||
ना रोटी की चिंता, न नाश्ते की फिकर |
साथ हो बातें हो, बातों से पेट भर जाये ||
Prashant Bhardwaj, Jan-2011
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