खुद ही रोये
और फिर खुद पर रोए
खुद हंसे
फिर खुद पर हंसे
कभी रोने पर हंसी आई
कभी हंसी पर रोना आया
थोड़ा हंसते रहे थोड़ा रोते रहे
न कुछ खोया न कुछ पाया
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खुद ही रोये
और फिर खुद पर रोए
खुद हंसे
फिर खुद पर हंसे
कभी रोने पर हंसी आई
कभी हंसी पर रोना आया
थोड़ा हंसते रहे थोड़ा रोते रहे
न कुछ खोया न कुछ पाया
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धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय । माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय ॥
मेरा गाँव मेरा देस
आई एम् फिरोम पश्चिमी उत्तर प्रदेश
नदी किनारे साँप है; अकेले अकेले चाय पीना पाप है
काली माता आएगी, उठा के ले जायेगी !!!
दूध चीनी रोक के ! चाय पत्ती ठोक के !
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The Tea Stall